जैसा की आप सभी जानते है पाइथागोरस प्रमेय के बारे में. यूनानी गणितज्ञ पाइथागोरस ने इस प्रमेय की रचना की थी . उनके अनुसार किसी समकोण त्रिभुज में कर्ण का वर्ग, लंब व आधार के वर्ग की योग के बराबर होता है. पर उनसे पूर्व भारतीय गणितज्ञ बोधायन इस प्रमेय की खोज कर चुके थे. भारत के प्राचीन ग्रंथ बौधायन शुल्बसूत्र में यह प्रमेय दिया हुआ है। इसे 'बौधायन-पाइथागोरस प्रमेय' भी कहते हैं।
बोधायन के अनुसार किसी समकोण त्रिभुज के कर्ण पर बने हुए वर्ग का क्षेत्रफल बाकि दोनों भुजाओ पर बने हुए वर्गो के क्षेत्रफलों के योग के बराबर होता है. माना जाता है की यूनानी गणितज्ञ पाइथागोरस भारत भ्रमण पर आये और इस प्रमेय को चुराकर यूनान ले गए और उसे नए रूप में प्रस्तुत किया. जिसे आज हम पढ़ते है. पर वास्तिकता यही है की इस प्रमेय का सिद्धिकरण बोधायन की सूत्र से ही होता है.
अगर हम कर्ण की लंबाई को c और अन्य दो भुजाओं की लंबाई को a और b लेते हैं, तो प्रमेय को निम्नलिखित समीकरण के रूप में व्यक्त किया जा सकता है:
C2 = a2+
b2
यह समीकरण समकोण त्रिभुज की तीनो भुजाओ के बीच एक साधारण सम्बन्ध को दर्शाता है. सामान्य रूप से इसे कोज्या का नियम भी कहते है जिसकी सहायता से हम किसी समकोण त्रिभुज की तीसरी भुजा की लम्बाई ज्ञात कर सकते है यदि उसकी अन्य दो भुजाओ की माप दी गयी हो. त्रिकोणमिति में इस सूत्र का प्रयोग अनिवार्य रूप से होता है.
धन्यवाद
यह समीकरण समकोण त्रिभुज की तीनो भुजाओ के बीच एक साधारण सम्बन्ध को दर्शाता है. सामान्य रूप से इसे कोज्या का नियम भी कहते है जिसकी सहायता से हम किसी समकोण त्रिभुज की तीसरी भुजा की लम्बाई ज्ञात कर सकते है यदि उसकी अन्य दो भुजाओ की माप दी गयी हो. त्रिकोणमिति में इस सूत्र का प्रयोग अनिवार्य रूप से होता है.
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